मुख्य चुनाव आयुक्त (सीईसी) ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विपक्षी ‘इंडिया’ (INDIA) गठबंधन ने आर-पार की लड़ाई का पूरा खाका तैयार कर लिया है. पिछले हफ्ते से चल रहे बैठकों के लंबे दौर के बाद विपक्षी दलों ने चुनाव आयोग के खिलाफ व्यापक विरोध प्रदर्शन की रणनीति पर अंतिम मुहर लगा दी है. यह मुद्दा लगातार सुर्खियों में बना हुआ है और इसे सोशल मीडिया व युवाओं (जेन-जी) के बीच सक्रिय विभिन्न तबकों का भी समर्थन मिल रहा है. विपक्षी दल ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे, विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) पर रोक लगाने और मतपत्र से चुनाव कराने की मांग कर रहे हैं.
सूत्रों के मुताबिक, इंडिया गठबंधन के तमाम सांसद मंगलवार को संसद भवन के मकर द्वार पर एकजुट होंगे और वहां से पैदल मार्च निकालते हुए सीधे निर्वाचन सदन (चुनाव आयोग मुख्यालय) का घेराव करने बढ़ेंगे. विपक्षी सांसदों के इस कड़े रुख को देखते हुए संसद से लेकर निर्वाचन सदन तक सुरक्षा व्यवस्था चाक-चौबंद की जा रही है. हालांकि, बड़ा सवाल यह बना हुआ है कि दिल्ली पुलिस इस हाई-प्रोफाइल पैदल मार्च को संसद परिसर से कितनी दूर तक आगे बढ़ने की इजाजत देती है.
इस मार्च में शामिल होने के लिए समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव के भी दिल्ली आने की उम्मीद है. उनकी पार्टी के कई सांसद पहले ही राजधानी पहुंच चुके हैं. लोकसभा में कांग्रेस के बाद समाजवादी पार्टी दूसरी सबसे बड़ी विपक्षी पार्टी है, जिसके पास अभी 37 सीटें हैं. कांग्रेस इस मार्च में आम आदमी पार्टी और DMK की भागीदारी सुनिश्चित करने की कोशिश कर रही है और दोनों पार्टियों को निमंत्रण भी भेजा गया है. यह बात इसलिए भी अहम है क्योंकि दोनों ही पार्टियां औपचारिक रूप से ‘इंडिया’ (INDIA) गठबंधन का हिस्सा नहीं हैं – हालांकि संसद के भीतर दोनों ही विपक्षी खेमे के साथ खड़ी हैं.
मुख्य विपक्षी पार्टी होने के नाते, कांग्रेस ने संसद के शीतकालीन सत्र तक इस मुद्दे को जनता के बीच जीवित रखने के लिए एक रोडमैप तैयार किया है. हालांकि कांग्रेस और समाजवादी पार्टी यही चाहेंगी कि फरवरी में होने वाले पांच राज्यों के विधानसभा चुनावों तक यह मुद्दा अहम बना रहे, लेकिन उनकी मौजूदा रणनीति संसद के अगले सत्र तक इस गति को बनाए रखने पर केंद्रित है.




