महाराष्ट्र के जलगांव तालुका में स्टेट बैंक की भोकर शाखा में हुई डकैती से हड़कंप मच गया है. दिनदहाड़े हथियारों से लैस हमलावरों ने वहां से लाखों रुपये नकद लूट लिए और फरार हो गए. इस डकैती के मामले में पुलिस ने शंकर जासक और गजानन पवार के साथ-साथ दो अन्य लोगों को भी गिरफ्तार किया है. उनके पास से करीब 15 लाख रुपये की नकदी और सोने से भरे बैग बरामद होने की प्राथमिक जानकारी है. चौंकाने वाली बात यह है कि इस डकैती में एक बर्खास्त पुलिस सब-इंस्पेक्टर के होने की बात सामने आई है.
बैंक डकैती का यह मामला किसी फिल्मी कहानी जैसा रोमांच पैदा करता है. पहले जेल में पहचान, फिर वहीं डकैती की साजिश और जमानत पर बाहर आने के बाद सीधे बैंक पर धावा! जलगांव तहसील के भोकर स्थित स्टेट बैंक में हुई डकैती की जांच में चौंकाने वाली जानकारी सामने आई है. इस डकैती का मास्टरमाइंड कोई और नहीं, बल्कि बर्खास्त पुलिस उपनिरीक्षक (एसआई) शंकर जासक के होने की प्राथमिक जानकारी सामने आई है.
साले की मदद से बैंक में डकैती
शंकर जासक ने 2023 में जलगांव शहर के शनिपेठ पुलिस स्टेशन की सीमा के अंतर्गत आने वाली स्टेट बैंक में अपने साले की मदद से तब्बल 3.17 करोड़ रुपये की डकैती डाली थी. इस अपराध के बाद वह जेल में था. सामान्यत तौर पर दो से तीन महीने पहले ही उसके जमानत पर बाहर आने की प्राथमिक जानकारी है. दूसरी ओर गजानन राजेंद्र पवार 2024 में चालिसगांव शहर के पास अनैतिक संबंधों के चलते अपनी प्रेमिका के पति की हत्या के मामले में जेल में था. वह भी लगभग डेढ़ महीने पहले ही जमानत पर बाहर आया था.
जेल में मुलाकात और खतरनाक साजिश
जलगांव सेंट्रल जेल में रहने के दौरान ही शंकर जासक और गजानन पवार की मुलाकात हुई थी. इसी पहचान के चलते दोनों ने मिलकर गिरोह बनाने और डकैती डालने की योजना बनाई थी, ऐसा पुलिस जांच में सामने आया है. इसके बाद दोनों ने दो अन्य साथियों को साथ लेकर भोकर स्थित स्टेट बैंक को अपना निशाना बनाया. डकैती के दिन चारों आरोपियों ने भोकर स्थित स्टेट बैंक में प्रवेश किया. छर्रे वाली पिस्तौल का डर दिखाकर उन्होंने बैंक के मैनेजर और कैशियर को धमकाया. दोनों के सिर पर पिस्तौल रखकर बैंक के कुल 16 लॉकर खुलवाए. उनमें रखा सोना बैग में भरकर आरोपी फरार हो गए.
5 से 6 बैग में कैश और सोना लेकर हुआ फरार
पुलिस सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, आरोपी करीब 40 से 45 मिनट तक बैंक के अंदर थे. बताया जाता है कि 5 से 6 बैग भरकर उन्होंने सोना और नकदी ले जाने की बात सामने आई है. डकैती के बाद शंकर जासक और गजानन पवार धरणगांव की तरफ भागे. इस बीच, भोकर के ग्रामीणों ने उनका पीछा करना शुरू कर दिया था. जिले की पूरी पुलिस मशीनरी को अलर्ट कर दिया गया था. भागते समय चावलखेड़ा के पास आरोपियों ने अपने पास मौजूद 4 बैग सड़क के किनारे फेंक दिए. चावलखेड़ा के पास लावारिस बैग मिलने की सूचना मिलते ही पुलिस इंस्पेक्टर उमाकांत गायकवाड़ ने अपनी टीम के साथ घटनास्थल का रुख किया. ग्रामीणों से आरोपियों के भागने की दिशा की जानकारी लेकर उन्होंने सर्च ऑपरेशन शुरू किया. आखिरकार शंकर जासक और गजानन पवार एक खेत में छिपे हुए मिले, जहां पुलिस ने जाल बिछाकर उन्हें गिरफ्तार कर लिया.
15 लाख नकद और सोने से भरे बैग बरामद
इस डकैती के मामले में पुलिस ने शंकर जासक और गजानन पवार के साथ-साथ दो अन्य लोगों को भी गिरफ्तार किया है. उनके पास से करीब 15 लाख रुपये की नकदी और सोने से भरे बैग बरामद होने की प्राथमिक जानकारी है. पुलिस पूछताछ में शंकर जासक और गजानन पवार ने जेल की पहचान से लेकर डकैती की योजना तक का पूरा घटनाक्रम बता दिया है. हालांकि, इन दोनों के साथ मौजूद अन्य दो आरोपियों की पृष्ठभूमि क्या है? इस गिरोह में उनकी एंट्री कैसे हुई? और डकैती में असल में कितनी नकदी व कितना सोना लूटा गया? इसकी जांच अभी जारी है. जेल से बाहर आते ही फिर से अपराध के रास्ते पर चलना और सीधे बैंक पर डाका डालना. इस पूरी घटना के कारण भोकर की इस डकैती की चर्चा अब पूरे जिले में हो रही है.




