Home छत्तीसगढ़ प्रशासनिक आदेशों की खुलेआम अवहेलना, जनपद पंचायत मुंगेली बना ‘सुपर पावर’!

प्रशासनिक आदेशों की खुलेआम अवहेलना, जनपद पंचायत मुंगेली बना ‘सुपर पावर’!

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= राज्य शासन के ट्रांसफर आदेश को लगभग साल भर से दबाकर बैठा है जनपद, कलेक्टर भी अनजान

मुंगेली/नवा रायपुर।- छत्तीसगढ़ शासन के पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग द्वारा जारी प्रशासनिक स्थानांतरण आदेशों की धज्जियां उड़ाने का एक चौंकाने वाला मामला मुंगेली जिले से सामने आया है। राज्य शासन के स्पष्ट आदेश के बावजूद सहायक विकास विस्तार अधिकारी (ADEO) हितेश कश्यप को आज तक जनपद पंचायत मुंगेली द्वारा कार्यमुक्त (रिलीव) नहीं किया गया है। यह स्थिति न केवल प्रशासनिक अराजकता को उजागर करती है, बल्कि यह भी सवाल खड़ा करती है कि क्या जिला स्तर पर शासन के आदेशों की कोई कीमत नहीं रह गई है?
राज्य शासन का आदेश… लेकिन ज़मीनी हकीकत शून्य
पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग, मंत्रालय महानदी भवन नवा रायपुर द्वारा वर्ष 2025 में जारी आदेश के अनुसार हितेश कश्यप, ADEO का जनपद पंचायत मुंगेली से जनपद पंचायत पंडरिया, जिला कबीरधाम में प्रशासनिक स्थानांतरण किया गया था। आदेश में स्पष्ट निर्देश थे कि संबंधित अधिकारी 10 दिवस के भीतर नवीन पदस्थापना स्थल पर कार्यभार ग्रहण करें।
लेकिन हैरानी की बात यह है कि जनपद पंचायत मुंगेली ने न केवल आदेश को दबा दिया, बल्कि अधिकारी को आज तक रिलीव ही नहीं किया।
दो साल से लोरमी में अटैच, फिर भी ट्रांसफर नहीं माना
सबसे गंभीर पहलू यह है कि हितेश कश्यप को जनपद पंचायत मुंगेली ने पिछले दो वर्षों से जनपद पंचायत लोरमी में अटैच कर रखा है।
यानि अधिकारी मूल पदस्थापना स्थल पर कार्यरत भी नहीं हैं, फिर भी जब राज्य शासन ने विधिवत ट्रांसफर किया, तो जनपद पंचायत मुंगेली ने उसे मानने से इनकार कर दिया।
यह सवाल लाजिमी है कि—
👉 जब अधिकारी खुद मुंगेली में कार्यरत नहीं है, तो किस आधार पर ट्रांसफर रोका गया?
👉 क्या अटैचमेंट शासन के आदेश से बड़ा हो गया है?
कलेक्टर बोले— ‘जानकारी नहीं है’
जब इस पूरे मामले में मुंगेली जिला कलेक्टर से जानकारी ली गई, तो उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि उन्हें इस ट्रांसफर और रिलीव न किए जाने की कोई जानकारी नहीं है।
कलेक्टर ने यह भी कहा कि “यदि ऐसा कोई शासनादेश है, तो तत्काल अधिकारी को रिलीव किया जाना चाहिए।”
अब बड़ा सवाल यह है कि—
📌 जब कलेक्टर ही अनजान हैं, तो जनपद पंचायत मुंगेली किसके आदेश पर ट्रांसफर रोककर बैठी है?
📌 क्या जिला प्रशासन के भीतर ही कोई समानांतर शासन चल रहा है?
प्रशासनिक अनुशासन पर गंभीर सवाल
राज्य शासन के आदेशों की इस तरह अनदेखी करना छत्तीसगढ़ सिविल सेवा आचरण नियमों और प्रशासनिक अनुशासन का खुला उल्लंघन है।
यदि एक साधारण जनपद पंचायत शासन के आदेशों को ठुकरा सकती है, तो इससे बड़ा प्रशासनिक पतन और क्या हो सकता है?
जनपद पंचायत मुंगेली पर सवालों की बौछार
क्या जनपद पंचायत मुंगेली खुद को शासन से ऊपर मानती है?
किसके संरक्षण में ट्रांसफर आदेश दबाया गया?
क्या किसी ‘सेटिंग’ या ‘सुविधा’ के कारण अधिकारी को रोका गया?
क्या यह प्रशासनिक भ्रष्टाचार का मामला है?
राज्य शासन से कार्रवाई की मांग
इस पूरे मामले में अब राज्य शासन से यह मांग उठने लगी है कि—
✔️ जनपद पंचायत मुंगेली के जिम्मेदार अधिकारियों पर अनुशासनात्मक कार्रवाई हो
✔️ ट्रांसफर आदेश की अवहेलना की उच्चस्तरीय जांच कराई जाए
✔️ अधिकारी को तत्काल जनपद पंचायत पंडरिया के लिए रिलीव किया जाए
निष्कर्ष
यह मामला केवल एक अधिकारी के ट्रांसफर का नहीं, बल्कि पूरे प्रशासनिक तंत्र की विश्वसनीयता का है।
यदि समय रहते कार्रवाई नहीं हुई, तो यह संदेश जाएगा कि छत्तीसगढ़ में शासन नहीं, बल्कि अफसरशाही की मनमानी चल रही है।

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