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राज बिहान रसोई से आत्मनिर्भर बनीं महिलाएं

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राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन बिहान से जुड़कर राजनांदगांव जिले की महिलाएं आत्मनिर्भरता की नई मिसाल पेश कर रही हैं। हुनर, मेहनत और आत्मविश्वास के बल पर वे न केवल आर्थिक रूप से सशक्त हो रही हैं, बल्कि समाज में अपनी अलग पहचान भी बना रही हैं। जिले में संचालित राज बिहान रसोई आज परंपरागत छत्तीसगढ़ी व्यंजनों का लोकप्रिय ठिकाना बन चुका है।

इस रसोई का संचालन प्रतिज्ञा महिला स्व-सहायता समूह की लखपति दीदी ज्ञानेश्वरी निषाद कर रही हैं। वे बताती हैं कि जब उन्होंने छोटे स्तर पर इस काम की शुरुआत की थी, तब यह नहीं सोचा था कि यह व्यवसाय इतना आगे बढ़ जाएगा। उनका कहना है कि यदि महिलाएं ठान लें तो कोई भी कार्य कठिन नहीं होता।

कलेक्टोरेट परिसर में संचालित राज बिहान रसोई में चीला, बड़ा, फरा, चौसेला, मुगोड़ी, साबुदाना बड़ा, अइरसा, ठेठरी, खुर्मी और बालुशाही जैसे पारंपरिक छत्तीसगढ़ी व्यंजन उपलब्ध हैं। स्वादिष्ट पकवानों के कारण यहां लगातार ऑर्डर मिल रहे हैं और मासिक आय लगभग 35 से 40 हजार रुपये तक पहुंच गई है।

ज्ञानेश्वरी बताती हैं कि पहले वे खेती-किसानी में परिवार की मदद करती थीं और आर्थिक स्थिति कमजोर थी। बाद में उन्होंने सामाजिक आयोजनों में भोजन बनाने का काम शुरू किया और बढ़ते ऑर्डर के बाद बिहान से ऋण लेकर राज बिहान रसोई की शुरुआत की।

आज उनकी टीम की सभी महिलाएं लखपति दीदी बन चुकी हैं। बिहान मिशन के सहयोग से उन्हें विभिन्न मेलों में भी अवसर मिला। गुरुग्राम, दिल्ली, कोलकाता, केरल, रायपुर और भिलाई के सरस मेलों में कैटरिंग कार्य कर उनकी टीम ने हर मेले में एक लाख रुपये से अधिक का शुद्ध लाभ अर्जित किया। आज राज बिहान रसोई महिलाओं की मेहनत, आत्मविश्वास और सफलता की मिसाल बन चुकी है।

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