छत्तीसगढ़ से नक्सलियों से जुड़ी बड़ी खबर है. जहां एक ओर नक्सली शांति वार्ता के लिए तैयार होने का दावा कर रहे हैं, तो वहीं दूसरी ओर सुरक्षाबल उनके खिलाफ आक्रामक रणनीति के साथ आगे बढ़ रहे हैं. उन्होंने नक्सलियों की खतरनाक बटालियन के हेडक्वार्टर और उनके बॉस हिड़मा के गांव पूर्वर्ती जहाँ पर कब्जा कर लिया है. यहां जवानों ने नया कैंप खोल दिया है. ये इलाका बीजापुर जिले से लगा हुआ है. यहां कैंप खोलना सुकमा पुलिस के लिए किसी बड़ी जीत से कम नहीं है.
बीजापुर के इन इलाकों में जवान कई कैंप स्थापित करने की योजना बना रहे हैं. सिलगेर में कैंप स्थापित करने के बाद जवानों ने 30 जनवरी को टेकलगुड़ा में कैंप खोला था. इस पर नक्सलियों ने हमला कर दिया था. इस हमले में तीन जवान शहीद हो गए थे. दरअसल ये इलाका घोर नक्सल प्रभावित है और बीजापुर की सीमा से लगा हुआ है. यहां बीते कई दशकों से नक्सलियों का कब्जा रहा है. उनके बड़े लीडर हिड़मा व देवा इसी गांव के रहने वाले हैं. लिहाजा नक्सलियों की जनताना सरकार इसी इलाके से संचालित की जाती है.
आसान नहीं था यहां कैंप स्थापित करना
पूर्वर्ती गांव सिलगेर से करीब 20 किमी दूर है. यहां जाने की हिम्मत न तो जवानों में थी और न ही आम आदमी में. लेकिन अब वहां पर नया कैंप खोल दिया गया है. कैंप खोलना आसान नहीं है. सुकमा पुलिस के इतिहास में अब तक का सबसे खतरनाक कैंप खोला गया है. यहां एसपी किरण चव्हाण ने खुद कैंप खोला है. 17 फरवरी को सुबह जब जवान वहां पहुंचे तो नक्सलियों ने हमला करने की कोशिश की, लेकिन जवानों की जवाबी कार्रवाई के चलते वो मौके से भाग गए. टेकिलगुडियम में हुए हमले के बाद फोर्स ने नई आक्रामक रणनीति अपनाई है. वे लगातार इस इलाके में आगे बढ़ रहे हैं.
पूरी तैयारी के साथ गए हैं जवान
सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक शुक्रवार सुबह जवानों ने कैंप खोलना शुरू किया. तब सेना को नक्सलियों को बटालियन की लोकेशन आसपास 5 किमी के दायरे में मिल रही थी. सुरक्षा बल के जवान भी पूरी तैयारी में गए हैं. इस कैंप के लिए सीआरपीएफ, कोबरा, डीआरजी, बस्तर फाइटर के जवान, दो आईपीएस, एसपी व एएसपी, डीआइजी सीआरपीएफ, कई डीएसपी के नेतृत्व में कैंप खोला गया है.




