मान लीजिए एक न्यूक्लियर बॉम्बर अपने टारगेट की ओर बढ़ रहा है. इसमें परमाणु हथियार लदे हैं, वो हथियार जो पूरी की पूरी सिटी को चंद सेकंड में तबाह कर सकते हैं. अचानक एक दुश्मन फाइटर जेट उसका पीछा करता है और हमला कर देता है. अब सोचिए, क्या होगा?
बॉम्बर हैवी होता है, लेकिन ‘लाचार’ नहीं
न्यूक्लियर बॉम्बर्स (जैसे अमेरिका का B-52, रूस का TU-160 या भविष्य का भारत का स्ट्रैटजिक बॉम्बर) आमतौर पर भारी और धीमे होते हैं, क्योंकि वे लंबी दूरी की उड़ान भरने और भारी पेलोड ले जाने के लिए बने होते हैं. लेकिन इसका मतलब ये नहीं कि वो बिना बचाव के उड़ते हैं. ये बॉम्बर्स इलेक्ट्रॉनिक जैमर्स, काउंटरमेजर्स, और कई बार एस्कॉर्ट फाइटर जेट्स के साथ चलते हैं. यानी उन पर हमला करना आसान नहीं होता.
फाइटर जेट का हमला: टारगेट लॉक और मिसाइल लॉन्च
अब अगर दुश्मन का कोई तेज और घातक फाइटर जेट जैसे F-35, Rafale या Su-30MKI उस बॉम्बर को ट्रैक कर लेता है, तो वो हवा से हवा में मार करने वाली मिसाइल (AAM) से हमला करेगा. पहली कोशिश यही होगी कि बॉम्बर को गिराया जाए, ताकि वह अपने न्यूक्लियर हथियार टारगेट पर न पहुंचा




